डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: 49 लाख की ठगी कैसे हुई और आप अगला शिकार बनने से कैसे बचें

By: Radhika Aggarwal

On: Wednesday, February 4, 2026 4:58 AM

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड 49 लाख की ठगी कैसे हुई और आप अगला शिकार बनने से कैसे बचें

सोचिए, कोई आपको फोन पर कहे कि आप “डिजिटल अरेस्ट” में हैं, फोन काटा तो जेल भेज दिए जाएंगे। डर इतना कि आप सो भी न सकें। यही डर एक बुजुर्ग व्यक्ति के लिए 49 लाख रुपये की ठगी का कारण बना।
इस लेख में हम बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड क्या है, यह कैसे काम करता है और इससे खुद को कैसे सुरक्षित रखें।

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड क्या है?

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड एक नया लेकिन बेहद खतरनाक साइबर स्कैम है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और कहते हैं कि आप किसी बड़े अपराध में फंस चुके हैं।

वे दावा करते हैं कि:

  • आपके आधार या बैंक अकाउंट का इस्तेमाल अवैध कामों में हुआ है
  • आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग या साइबर क्राइम की जांच चल रही है
  • आपको “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया जा रहा है

असल में भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रोसेस होता ही नहीं, लेकिन डर के कारण लोग सोचने-समझने की क्षमता खो देते हैं।

49 लाख की ठगी वाला मामला: क्या हुआ था?

यह मामला इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें ठगों ने सिर्फ पैसे नहीं ठगे, बल्कि पीड़ित को मानसिक रूप से पूरी तरह कंट्रोल कर लिया।

नीचे पूरा घटनाक्रम आसान स्टेप्स में समझिए:

स्टेपक्या हुआ
1बुजुर्ग को एक कॉल आया, कॉलर ने खुद को टेलीकॉम विभाग का कर्मचारी बताया
2कहा गया कि उनके मोबाइल नंबर से अवैध गतिविधि हुई है
3कॉल ट्रांसफर कर “पुलिस अधिकारी” से बात करवाई गई
4आरोप लगाया गया कि उनका बैंक अकाउंट मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ
5कहा गया कि वह “डिजिटल अरेस्ट” में हैं
6हर एक घंटे में “मैं सुरक्षित हूँ” मैसेज भेजने को कहा गया
7डर के कारण पीड़ित को किसी से बात करने की इजाज़त नहीं दी गई
8दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल 49 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए
9भरोसा दिलाया गया कि पैसे जांच के बाद वापस मिल जाएंगे
10बाद में कॉल बंद हो गई और ठगी का पता चला

यह ठगी सिर्फ पैसों की नहीं थी, यह भरोसे और डर की ठगी थी।

ठग “डिजिटल अरेस्ट” में कैसे फँसाते हैं?

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में ठग एक तय रणनीति अपनाते हैं:

1. डर पैदा करना

सबसे पहले आपको बताया जाता है कि मामला बहुत गंभीर है और गिरफ्तारी हो सकती है।

2. सरकारी भाषा का इस्तेमाल

वे कानूनी शब्दों और नकली आईडी का इस्तेमाल करते हैं ताकि बात असली लगे।

3. अकेला कर देना

कहा जाता है कि अगर आपने किसी से बात की तो केस और बिगड़ जाएगा।

4. समय का दबाव

आपको सोचने का समय नहीं दिया जाता। तुरंत फैसला लेने को मजबूर किया जाता है।

5. पैसे को “सेफ्टी मनी” बताना

पैसे को रिश्वत नहीं बल्कि “जांच प्रक्रिया का हिस्सा” बताया जाता है।

सबसे खतरनाक संकेत जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

अगर कभी आपको ये संकेत दिखें, तो समझ जाइए कि यह फ्रॉड हो सकता है:

  • फोन पर गिरफ्तारी की धमकी
  • वीडियो कॉल पर वर्दी दिखाकर डराना
  • बार-बार कॉल कर मानसिक दबाव बनाना
  • किसी से बात न करने का आदेश
  • पैसे ट्रांसफर करने की जल्दी

सरकारी एजेंसियां कभी भी इस तरह से काम नहीं करतीं।

असली पुलिस और साइबर फ्रॉड में फर्क

असली पुलिससाइबर ठग
नोटिस लिखित रूप मेंफोन / व्हाट्सएप कॉल
थाने बुलाकर पूछताछघर बैठे डराना
गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया से“डिजिटल अरेस्ट” का झूठ
पैसे नहीं मांगतीअकाउंट में ट्रांसफर करवाते हैं

अगर कोई आपको “डिजिटल अरेस्ट” बोले तो तुरंत क्या करें?

Step-by-Step गाइड

Step 1: फोन काट दें

डर लग रहा हो तब भी कॉल जारी न रखें।

Step 2: किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें

परिवार या दोस्त से तुरंत बात करें।

Step 3: बैंक को सूचित करें

अगर आपने अकाउंट डिटेल्स दी हैं तो तुरंत बैंक को बताएं।

Step 4: साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें

जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, पैसे बचने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

बुजुर्ग और पढ़े-लिखे लोग भी क्यों फँस जाते हैं?

कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ अनपढ़ या तकनीक न जानने वाले लोग ही फँसते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

कारण:

  • सरकारी सिस्टम पर अंधा भरोसा
  • डर की स्थिति में तर्क खत्म हो जाना
  • ठगों की पेशेवर स्क्रिप्ट
  • लगातार मानसिक दबाव

इसलिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है।

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचने के आसान नियम

  • कभी भी फोन पर गिरफ्तारी की बात पर भरोसा न करें
  • OTP, बैंक डिटेल्स किसी को न दें
  • सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगते
  • शक हो तो कॉल काटना अपराध नहीं है
  • डर के बजाय जांच करें

Conclusion

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड सिर्फ एक स्कैम नहीं, बल्कि डर का जाल है। ठग कानून का नाम लेकर लोगों की सोच बंद कर देते हैं।
अगर आप सतर्क हैं, सवाल पूछते हैं और जल्दबाजी में फैसले नहीं लेते, तो आप और आपका परिवार इस तरह की ठगी से सुरक्षित रह सकते हैं।

Q.1 डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड क्या सच में होता है?

नहीं, डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

Q.2 क्या पुलिस फोन पर पैसे मांग सकती है?

नहीं, पुलिस या कोई एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती।

Q.3 अगर पैसे ट्रांसफर हो जाएं तो क्या करें?

तुरंत बैंक और साइबर सेल को सूचना दें।

Q.4 क्या पढ़े-लिखे लोग भी इसका शिकार बनते हैं?

हाँ, डर और दबाव में कोई भी गलती कर सकता है।

Radhika Aggarwal

Radhika Aggarwal एक उत्साही कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स जैसे विषयों पर लिखना पसंद है। वह जटिल जानकारियों को आसान, साफ और पाठकों के लिए उपयोगी भाषा में पेश करने में विश्वास रखती हैं। नए ट्रेंड्स, लेटेस्ट अपडेट्स और गहराई से रिसर्च किए गए आर्टिकल्स लिखना उनकी खासियत है। उनका लक्ष्य पाठकों को भरोसेमंद, इनफॉर्मेटिव और रोचक कंटेंट देना है, जिससे वे सही फैसले ले सकें।
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